मुखौटे बचपन में देखे थे मेले में टंगे हुए समझ बढ़ी तो देखा लोगों पे है चढ़े हुऐ

मुखौटे बचपन में देखे थे मेले में टंगे हुए समझ बढ़ी तो देखा लोगों पे है चढ़े हुऐ

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जहाँ भरोसा है वहाँ सावधानी जरूर होनी चाहिए।

सच्चे लोगों के साथ सच्ची बात करे, और मतलबी लोगों के साथ सिर्फ मतलब की बात करे।

जब पास पैसे थे तब सारी दुनिया साथ थी, आज पास कुछ नहीं तो साथ भी कोई नहीं।

जब हमने ऊपर उठने की कोशिश की तो पीछे खिचने वाले वो ही लोग थे, जिन्हे हम अपना समझ बैठे थे।

न जाने कैसी नज़र लगी है ज़माने की अब वजह नहीं मिलती मुस्कुराने की

इतिहास गवा है, जितना धोका दुश्मनों से नहीं हुआ उतना धोखा दोस्तों से हुआ है।

जहाँ भरोसा है वहाँ सावधानी जरूर होनी चाहिए।

सच्चे लोगों के साथ सच्ची बात करे, और मतलबी लोगों के साथ सिर्फ मतलब की बात करे।

जब पास पैसे थे तब सारी दुनिया साथ थी, आज पास कुछ नहीं तो साथ भी कोई नहीं।

जब हमने ऊपर उठने की कोशिश की तो पीछे खिचने वाले वो ही लोग थे, जिन्हे हम अपना समझ बैठे थे।

न जाने कैसी नज़र लगी है ज़माने की अब वजह नहीं मिलती मुस्कुराने की

इतिहास गवा है, जितना धोका दुश्मनों से नहीं हुआ उतना धोखा दोस्तों से हुआ है।