देख लिया खुद को बिजी रख कर भी फिर भी याद सिर्फ तुम्हारी आती हैं.

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किस हक़ से माँगहु अपने हिस्से का वक़त आपसे, क्यूंकि न आप मेरे हो और न ही वक़त मेरा है

कई बार ऐसा भी होता है के ज़रूरत से ज़्यादा सोचना भी इंसान की खुशियां छीन लेता है।

काश कि वो लौट आयें मुझसे यह कहने, कि तुम कौन होते हो मुझसे बिछड़ने वाले..!!!

बेवजह हाल कोई नहीं पूछता आज कल, हर बात की एक वजह होती है आज कल।

बेहद हदे पार की थी हमने कभी किसी के लिए, आज उसी ने सिखा दिया हद में रहना...!!

कभी कभी हम गलत नहीं होते, बस वो शब्द ही नहीं होते जो हमें सही साबित कर सके

किस हक़ से माँगहु अपने हिस्से का वक़त आपसे, क्यूंकि न आप मेरे हो और न ही वक़त मेरा है

कई बार ऐसा भी होता है के ज़रूरत से ज़्यादा सोचना भी इंसान की खुशियां छीन लेता है।

काश कि वो लौट आयें मुझसे यह कहने, कि तुम कौन होते हो मुझसे बिछड़ने वाले..!!!

बेवजह हाल कोई नहीं पूछता आज कल, हर बात की एक वजह होती है आज कल।

बेहद हदे पार की थी हमने कभी किसी के लिए, आज उसी ने सिखा दिया हद में रहना...!!

कभी कभी हम गलत नहीं होते, बस वो शब्द ही नहीं होते जो हमें सही साबित कर सके