क्या इतने दूर निकल आये हैं हम, कि तेरे ख्यालों में भी नही आते ?

क्या इतने दूर निकल आये हैं हम, कि तेरे ख्यालों में भी नही आते ?

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मेरी याद क़यामत की तरह है एक दिन ज़रूर आएगी

काश आंसूं के साथ यादें बाह जाती .. तो एक दिन तसली के साथ बैठ कर रो लेता ...

किस हक़ से माँगहु अपने हिस्से का वक़त आपसे, क्यूंकि न आप मेरे हो और न ही वक़त मेरा है

दिल की बात तो हर कोई करता है लेकिन मरते सब चेहरों पर ही हैं

चेहरा तो मिल जाएगा हम से भी खूबसूरत पर बात दिल की आएगी ना हार जाओगे

ना अपने पास हूं ना तेरे साथ हूं, बहुत दिनों से मैं यूं ही उदास हूं !

मेरी याद क़यामत की तरह है एक दिन ज़रूर आएगी

काश आंसूं के साथ यादें बाह जाती .. तो एक दिन तसली के साथ बैठ कर रो लेता ...

किस हक़ से माँगहु अपने हिस्से का वक़त आपसे, क्यूंकि न आप मेरे हो और न ही वक़त मेरा है

दिल की बात तो हर कोई करता है लेकिन मरते सब चेहरों पर ही हैं

चेहरा तो मिल जाएगा हम से भी खूबसूरत पर बात दिल की आएगी ना हार जाओगे

ना अपने पास हूं ना तेरे साथ हूं, बहुत दिनों से मैं यूं ही उदास हूं !