तमाशा बन गयी है ज़िन्दगी कुछ कहे तो भी बुरे और कुछ न कहे तो भी बुरे

तमाशा बन गयी है ज़िन्दगी कुछ कहे तो भी बुरे और कुछ न कहे तो भी बुरे

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तुम ठहर नहीं सकते... जानती हूँ.... मगर.. मैं तो तुम्हारे साथ... चल सकती हूँ ना

जब ऑंसू गिरने बंद हो जाये तोह तकलीफ गुस्सा बन क बाहर अति है

हजारो मेहफिल है .. लाखो मेले है, पर जहा तुम नहीं वहा हम अकेले है

जब मिलती ही नहीं...तो मोहब्बत होती क्यूँ है...!!!

जिनको साथ नहीं देना होता वो अक्सर रूठ जाया करते हैं

एहसासों की नमी बेहद जरुरी है हर रिश्ते में ,,रेत भी सूखी हो तो हाथों से फिसल जाती है !!

तुम ठहर नहीं सकते... जानती हूँ.... मगर.. मैं तो तुम्हारे साथ... चल सकती हूँ ना

जब ऑंसू गिरने बंद हो जाये तोह तकलीफ गुस्सा बन क बाहर अति है

हजारो मेहफिल है .. लाखो मेले है, पर जहा तुम नहीं वहा हम अकेले है

जब मिलती ही नहीं...तो मोहब्बत होती क्यूँ है...!!!

जिनको साथ नहीं देना होता वो अक्सर रूठ जाया करते हैं

एहसासों की नमी बेहद जरुरी है हर रिश्ते में ,,रेत भी सूखी हो तो हाथों से फिसल जाती है !!