किस हक़ से माँगहु अपने हिस्से का वक़त आपसे, क्यूंकि न आप मेरे हो और न ही वक़त मेरा है

किस हक़ से माँगहु अपने हिस्से का वक़त आपसे, क्यूंकि न आप मेरे हो और न ही वक़त मेरा है

Share:

More Like This

एक बात कहु जिनसे बात करने की आदत हो जाती है है ना, उनसे अगर एक दिन बात न हो तो दिल उदास हो जाता है

जिन्हे भी मुझसे मिलने का वक़्त नहीं मिलता देख लेना एक दिन होगा जब मैं इतना दूर चला जाऊंगा की तुम्हे मुझसे मिलने का मौका भी नहीं मिलेगा।

कोई भी सफर कभी खत्म नही होता या तो रास्ता बदल जाता है या फिर वास्ता ख़त्म हो जाता है

जब दो लोगो के बीच में तीसरा इंसान आ जाता है तो दूरियां अपने आप बढ़ जाती है

युं ही हम दिल को साफ़ रखा करते थे…पता नही था की, ‘किमत चेहरों की होती है’ !

एक दिमाग वाला दिल मुझे भी दे दे ख़ुदा, ये दिल वाला दिल सिर्फ़ तकलीफ़ ही देता हैं..

एक बात कहु जिनसे बात करने की आदत हो जाती है है ना, उनसे अगर एक दिन बात न हो तो दिल उदास हो जाता है

जिन्हे भी मुझसे मिलने का वक़्त नहीं मिलता देख लेना एक दिन होगा जब मैं इतना दूर चला जाऊंगा की तुम्हे मुझसे मिलने का मौका भी नहीं मिलेगा।

कोई भी सफर कभी खत्म नही होता या तो रास्ता बदल जाता है या फिर वास्ता ख़त्म हो जाता है

जब दो लोगो के बीच में तीसरा इंसान आ जाता है तो दूरियां अपने आप बढ़ जाती है

युं ही हम दिल को साफ़ रखा करते थे…पता नही था की, ‘किमत चेहरों की होती है’ !

एक दिमाग वाला दिल मुझे भी दे दे ख़ुदा, ये दिल वाला दिल सिर्फ़ तकलीफ़ ही देता हैं..