अभी कदर नही है ना तुम्हे मेरी देखना एक दिन तड़पोगे मुझसे बात करने के लिए
अकेली रात .. बोलती बहुत है लेकिन सुन वही सकता है जो खुद भी अकेला हो .
सब अपने से लगते है, लेकिन सिर्फ बातों से ..!
हम नादान ही अच्छे हैं दुनिया के समझदार लोगों से, हम अपने ख़्वाब जरूर तोडते हैं पर किसी का दिल नही
हम नादान थे जो उसे हमसफ़र समझ बैठे जो चलती थी साथ मेरे पर तलाश उसे किसी और की थी
किताबों सी शख्सियत दे दे मालिक...सब कुछ बोल दूँ खामोश रहकर....
अभी कदर नही है ना तुम्हे मेरी देखना एक दिन तड़पोगे मुझसे बात करने के लिए
अकेली रात .. बोलती बहुत है लेकिन सुन वही सकता है जो खुद भी अकेला हो .
सब अपने से लगते है, लेकिन सिर्फ बातों से ..!
हम नादान ही अच्छे हैं दुनिया के समझदार लोगों से, हम अपने ख़्वाब जरूर तोडते हैं पर किसी का दिल नही
हम नादान थे जो उसे हमसफ़र समझ बैठे जो चलती थी साथ मेरे पर तलाश उसे किसी और की थी
किताबों सी शख्सियत दे दे मालिक...सब कुछ बोल दूँ खामोश रहकर....