जब मिलती ही नहीं...तो मोहब्बत होती क्यूँ है...!!!
ये बात सच है जब किसी की ज़िन्दगी में नए लोग आ जाते है तो वो पुराने लोगो की अहमियत को भूल जाते है
डूबे हुओं को हमने बिठाया था अपनी कश्ती में यारो..... और फिर कश्ती का बोझ कहकर, हमे ही उतारा गया
सच कहूँ आज पहली दफा लगा की दूरियाँ बड़ी ज़ालिम हैं
अकेली रात बोलती बहुत है लेकिन सुन वही सकता है जो खुद भी अकेला हो
कदर करना सिख लो क्योंकि.. ना ही ज़िंदगी वापिस आती है और ना ही लोग..
जब मिलती ही नहीं...तो मोहब्बत होती क्यूँ है...!!!
ये बात सच है जब किसी की ज़िन्दगी में नए लोग आ जाते है तो वो पुराने लोगो की अहमियत को भूल जाते है
डूबे हुओं को हमने बिठाया था अपनी कश्ती में यारो..... और फिर कश्ती का बोझ कहकर, हमे ही उतारा गया
सच कहूँ आज पहली दफा लगा की दूरियाँ बड़ी ज़ालिम हैं
अकेली रात बोलती बहुत है लेकिन सुन वही सकता है जो खुद भी अकेला हो
कदर करना सिख लो क्योंकि.. ना ही ज़िंदगी वापिस आती है और ना ही लोग..