जिनको मेरी फ़िक्र नहीं उनका अब से कोई ज़िक्र नहीं
जब 'मतलब' ना होतो लोग बोलना तो दूर देखना तक छोड़ देते है .
गया था मै तुझसे दुर बहुत कुछ पाने के लिए ……….पर सिवाए तेरी यादो के कुछ हासिल ना हुआ !!!!
हमे पता है की तुम कहीं और के मुसाफिर हो, हमारा शहर तो यूँ ही बिच में आया था
अजीब तरह से गुजर रही है ज़िंदगी .. सोचा कुछ, किया कुछ हुआ कुछ, मिला कुछ ..
"आँखों से हाल पूछा दिल का, एक बूंद टपक पड़ी लहू की..."
जिनको मेरी फ़िक्र नहीं उनका अब से कोई ज़िक्र नहीं
जब 'मतलब' ना होतो लोग बोलना तो दूर देखना तक छोड़ देते है .
गया था मै तुझसे दुर बहुत कुछ पाने के लिए ……….पर सिवाए तेरी यादो के कुछ हासिल ना हुआ !!!!
हमे पता है की तुम कहीं और के मुसाफिर हो, हमारा शहर तो यूँ ही बिच में आया था
अजीब तरह से गुजर रही है ज़िंदगी .. सोचा कुछ, किया कुछ हुआ कुछ, मिला कुछ ..
"आँखों से हाल पूछा दिल का, एक बूंद टपक पड़ी लहू की..."