अकेली रात .. बोलती बहुत है लेकिन सुन वही सकता है जो खुद भी अकेला हो .

अकेली रात .. बोलती बहुत है लेकिन सुन वही सकता है जो खुद भी अकेला हो .

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काटे तो नसीब में आने ही थे.. फूल जो गुलाब चुना था हमने..

रख लो दिल में सम्हाल कर थोड़ी सी याद मेरी....,रह जाओगे जब तन्हा तो हम बहुत काम आएँगे

किस मुकाम पर ले आई है ये मोहब्बत हमे उसे पाया भी नहीं जाता और भुलाया भी नहीं जाता

एक उम्र बीत जाती है किसी को अपना बनाने में और एक पल काफी होता है किसी अपने को गवाने में

रिश्ते धीरे धीरे ही खत्म होते हैं बस पता अचानक सा चलता हैं .

मौत आये तो शायद दिन सवर जाए वरना ज़िंदगी ने तो मार ही डाला है

काटे तो नसीब में आने ही थे.. फूल जो गुलाब चुना था हमने..

रख लो दिल में सम्हाल कर थोड़ी सी याद मेरी....,रह जाओगे जब तन्हा तो हम बहुत काम आएँगे

किस मुकाम पर ले आई है ये मोहब्बत हमे उसे पाया भी नहीं जाता और भुलाया भी नहीं जाता

एक उम्र बीत जाती है किसी को अपना बनाने में और एक पल काफी होता है किसी अपने को गवाने में

रिश्ते धीरे धीरे ही खत्म होते हैं बस पता अचानक सा चलता हैं .

मौत आये तो शायद दिन सवर जाए वरना ज़िंदगी ने तो मार ही डाला है