कोई भी सफर कभी खत्म नही होता या तो रास्ता बदल जाता है या फिर वास्ता ख़त्म हो जाता है
तेरी कसम सिर्फ तेरे हैं हम
जो प्यार नहीं सच्चा उसे भूल जाना ही अच्छा
हमे बुरा न समझो जनाब हम दर्द लिखते है देते नहीं.
तकलीफे तो हजारो है इस ज़माने में| बस कोई अपना नज़र अंदाज करे तो बर्दाश्त नहीं होती !!
वो जा रहा है छोड़ कर..बताओ रास्ता दूँ या वास्ता दूँ...?
कोई भी सफर कभी खत्म नही होता या तो रास्ता बदल जाता है या फिर वास्ता ख़त्म हो जाता है
तेरी कसम सिर्फ तेरे हैं हम
जो प्यार नहीं सच्चा उसे भूल जाना ही अच्छा
हमे बुरा न समझो जनाब हम दर्द लिखते है देते नहीं.
तकलीफे तो हजारो है इस ज़माने में| बस कोई अपना नज़र अंदाज करे तो बर्दाश्त नहीं होती !!
वो जा रहा है छोड़ कर..बताओ रास्ता दूँ या वास्ता दूँ...?