एक खेल रत्न उसको भी दे दो, बड़ा अच्छा खेलती है वो दिल से

एक खेल रत्न उसको भी दे दो, बड़ा अच्छा खेलती है वो दिल से

Share:

More Like This

कुछ लोग आए थे मेरा दुख बाँटने मैं जब खुश हुआ तो खफा होकर चल दिये

रुलाती है मगर रोने का नहीं.

कभी कभी हम गलत नहीं होते, बस वो शब्द ही नहीं होते जो हमें सही साबित कर सके

जिनको साथ नहीं देना होता वो अक्सर रूठ जाया करते हैं

"मेरी आँखों की नमी ना जान पाया वो शख्स, एक अरसे तक जो इन आँखों में ही रहा था...!"

जवाब तो हर बात का दिया जा सकता है, मगर जो रिश्तो की अहमियत ना समझ पाया वह शब्दों को क्या समझेगा

कुछ लोग आए थे मेरा दुख बाँटने मैं जब खुश हुआ तो खफा होकर चल दिये

रुलाती है मगर रोने का नहीं.

कभी कभी हम गलत नहीं होते, बस वो शब्द ही नहीं होते जो हमें सही साबित कर सके

जिनको साथ नहीं देना होता वो अक्सर रूठ जाया करते हैं

"मेरी आँखों की नमी ना जान पाया वो शख्स, एक अरसे तक जो इन आँखों में ही रहा था...!"

जवाब तो हर बात का दिया जा सकता है, मगर जो रिश्तो की अहमियत ना समझ पाया वह शब्दों को क्या समझेगा