तेरी नाराज़गी वाजिब है दोस्त.. मैं भी खुद से खुश नहीं हूं आजकल...
ज़िन्दगी चैन से गुज़र जाए , तू अगर ज़हन से उतर जाए
बुरा वक़्त दर्द नहीं देता बुरे वक़्त में साथ छोड़ने वाले दर्द देते है
ना अपने पास हूं ना तेरे साथ हूं, बहुत दिनों से मैं यूं ही उदास हूं !
हजारो मेहफिल है .. लाखो मेले है, पर जहा तुम नहीं वहा हम अकेले है
हद से बढ़ जाये ताल्लुक तो ग़म मिलते हैं| हम इसी वास्ते हर सख्स से कम मिलते हैं|
तेरी नाराज़गी वाजिब है दोस्त.. मैं भी खुद से खुश नहीं हूं आजकल...
ज़िन्दगी चैन से गुज़र जाए , तू अगर ज़हन से उतर जाए
बुरा वक़्त दर्द नहीं देता बुरे वक़्त में साथ छोड़ने वाले दर्द देते है
ना अपने पास हूं ना तेरे साथ हूं, बहुत दिनों से मैं यूं ही उदास हूं !
हजारो मेहफिल है .. लाखो मेले है, पर जहा तुम नहीं वहा हम अकेले है
हद से बढ़ जाये ताल्लुक तो ग़म मिलते हैं| हम इसी वास्ते हर सख्स से कम मिलते हैं|