दर्द सहने की कुछ यु आदत सी हो गई है.... की अब दर्द न मिले तो दर्द सा होता है
वो हर बात मुझसे छुपाने लगे हैं, वो मेरे हिस्से का वक़त किसी और के साथ बिताने लगे हैं
कीमत दोनों की चुकनी पड़ती है, बोलने की भी और चुप रहने की भी ..!!
सिलसिला आज भी वही जारी है, तेरी याद, मेरी नींदों पर भारी है
तुम बेवफा नही मगर इतना ज़रूर हैं तुम पहले जैसे थे अब वैसे नही रहे
मेरे ग़म को कोई नहीं समझ सका क्यों के मुझे आदत थी मुस्कराने की
दर्द सहने की कुछ यु आदत सी हो गई है.... की अब दर्द न मिले तो दर्द सा होता है
वो हर बात मुझसे छुपाने लगे हैं, वो मेरे हिस्से का वक़त किसी और के साथ बिताने लगे हैं
कीमत दोनों की चुकनी पड़ती है, बोलने की भी और चुप रहने की भी ..!!
सिलसिला आज भी वही जारी है, तेरी याद, मेरी नींदों पर भारी है
तुम बेवफा नही मगर इतना ज़रूर हैं तुम पहले जैसे थे अब वैसे नही रहे
मेरे ग़म को कोई नहीं समझ सका क्यों के मुझे आदत थी मुस्कराने की