इंसान अपने कर्म से बड़ा होता है, अपने जन्म से नहीं .

इंसान अपने कर्म से बड़ा होता है, अपने जन्म से नहीं .

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मुझमें ही हौसला नहीं वरना .. छत का पंखा पुकारता है मुझे....

तब रिश्ता समझ लीजिए ख़त्म हो जाता है जब दो प्यार की बात करने वाले लोग बस काम की बात करने के लिए बातें करते हैं।

शब्द केवल चुभते है, खमोशियाँ मार देती हैं.

कुछ पल के लिए मुझे अपनी बाँहों में सुला दे अगर आँख खुली तो उठा देना और अगर न खुली तो दफना देना

रख लो दिल में सम्हाल कर थोड़ी सी याद मेरी....,रह जाओगे जब तन्हा तो हम बहुत काम आएँगे

जितना तुझे किसी ने चाहा भी न होगा उतना तो मैंने सिर्फ तुझे याद किया है

मुझमें ही हौसला नहीं वरना .. छत का पंखा पुकारता है मुझे....

तब रिश्ता समझ लीजिए ख़त्म हो जाता है जब दो प्यार की बात करने वाले लोग बस काम की बात करने के लिए बातें करते हैं।

शब्द केवल चुभते है, खमोशियाँ मार देती हैं.

कुछ पल के लिए मुझे अपनी बाँहों में सुला दे अगर आँख खुली तो उठा देना और अगर न खुली तो दफना देना

रख लो दिल में सम्हाल कर थोड़ी सी याद मेरी....,रह जाओगे जब तन्हा तो हम बहुत काम आएँगे

जितना तुझे किसी ने चाहा भी न होगा उतना तो मैंने सिर्फ तुझे याद किया है