ज़हर का भी अपना हिसाब है, मरने के लिए थोड़ा सा और जीने के लिए बहुत सारा पीना पड़ता है.!

ज़हर का भी अपना हिसाब है, मरने के लिए थोड़ा सा और जीने के लिए बहुत सारा पीना पड़ता है.!

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डूबे हुओं को हमने बिठाया था अपनी कश्ती में यारो..... और फिर कश्ती का बोझ कहकर, हमे ही उतारा गया

दुआ हैं हर किसी को कोई ऐसा मिले जो उसे कभी रोने ना दे

मेरे मरने पर तो रोने वाले बहुत हैं तलाश उसकी है जो मेरे रोने से मर जाए

मत कर मोहबत तेरे बस की बात नही जो दर्द मेरे पास है, उस दर्द की दवा तेरे पास नही.

कुछ दूर हमारे साथ चलो, हम दिल की कहानी कह देंगे, समझे ना जिसे तुम आखो से, वो बात जुबानी कह देंगे ।

जो प्यार नहीं सच्चा उसे भूल जाना ही अच्छा

डूबे हुओं को हमने बिठाया था अपनी कश्ती में यारो..... और फिर कश्ती का बोझ कहकर, हमे ही उतारा गया

दुआ हैं हर किसी को कोई ऐसा मिले जो उसे कभी रोने ना दे

मेरे मरने पर तो रोने वाले बहुत हैं तलाश उसकी है जो मेरे रोने से मर जाए

मत कर मोहबत तेरे बस की बात नही जो दर्द मेरे पास है, उस दर्द की दवा तेरे पास नही.

कुछ दूर हमारे साथ चलो, हम दिल की कहानी कह देंगे, समझे ना जिसे तुम आखो से, वो बात जुबानी कह देंगे ।

जो प्यार नहीं सच्चा उसे भूल जाना ही अच्छा