पुछा किसी ने की याद आती है उसकी में मुस्कुराया और बोला तभी तो ज़िंदा हूँ
मौत आये तो शायद दिन सवर जाए वरना ज़िंदगी ने तो मार ही डाला है
एक थी समझने वाली मुझे ... अब वो भी समझदार हो गयी है
रिश्ते वो होते हैं जिसमे शब्द कम और समझ ज्यादा हो......
सोचते है, अब हम भी सीख ले यारों बेरुखी करना..सबको मोहब्बत देते-देते, हमने अपनी कदर खो दी है
कुछ पल निकाल लिया करो मेरे लिए भी, दिल बहुत उदास रहता है जब तुमसे बात नहीं होती
पुछा किसी ने की याद आती है उसकी में मुस्कुराया और बोला तभी तो ज़िंदा हूँ
मौत आये तो शायद दिन सवर जाए वरना ज़िंदगी ने तो मार ही डाला है
एक थी समझने वाली मुझे ... अब वो भी समझदार हो गयी है
रिश्ते वो होते हैं जिसमे शब्द कम और समझ ज्यादा हो......
सोचते है, अब हम भी सीख ले यारों बेरुखी करना..सबको मोहब्बत देते-देते, हमने अपनी कदर खो दी है
कुछ पल निकाल लिया करो मेरे लिए भी, दिल बहुत उदास रहता है जब तुमसे बात नहीं होती