मुझमें ही हौसला नहीं वरना .. छत का पंखा पुकारता है मुझे....
जिस चाँद के हजारों हो चाहने वाले दोस्त, वो क्या समझेगा एक सितारे कि कमी को…
कदर करना सिख लो क्योंकि.. ना ही ज़िंदगी वापिस आती है और ना ही लोग..
रिश्ते वेहम से भी ख़तम हो जाते हैं, अक्सर क़ुसूर हमेशा गलतियों का नहीं होता
एक बात कहु जिनसे बात करने की आदत हो जाती है है ना, उनसे अगर एक दिन बात न हो तो दिल उदास हो जाता है
तुम जो साथ हो तो दुनिया अपनी सी लगती है वरना सीने में सांस भी पराई लगती है
मुझमें ही हौसला नहीं वरना .. छत का पंखा पुकारता है मुझे....
जिस चाँद के हजारों हो चाहने वाले दोस्त, वो क्या समझेगा एक सितारे कि कमी को…
कदर करना सिख लो क्योंकि.. ना ही ज़िंदगी वापिस आती है और ना ही लोग..
रिश्ते वेहम से भी ख़तम हो जाते हैं, अक्सर क़ुसूर हमेशा गलतियों का नहीं होता
एक बात कहु जिनसे बात करने की आदत हो जाती है है ना, उनसे अगर एक दिन बात न हो तो दिल उदास हो जाता है
तुम जो साथ हो तो दुनिया अपनी सी लगती है वरना सीने में सांस भी पराई लगती है