उसे गजब का शौंक है हरियाली का, रोज आकर जख्मों को हरा कर जाती है
जब लोगों के दिल भर जाते हैं..... तो दूर जाने के बहाने अपने आप मिल जाते हैं.....!
कुछ चुप रहती हूँ, कुछ बोलती हूँ, कुछ रिश्ते मेरे इसी से संभले हुए हैं ......
वो रो रो कर कहती रही, मुझे नफरत है तुमसे, मगर एक सवाल आज भी परेशान किये हुए है की अगर इतनी नफरत ही थी तो, वो रोई क्यों
पता नहीं क्यों मोहब्बत उस शख्स से हो जाती है जिसे हमारी बिलकुल क़दर नहीं होती न हमारी मोहब्बत की न हमारे एहसास की
चलते रहेंगे क़ाफ़िले मेरे बग़ैर भी यहाँ.एक तारा टूट जाने से, फ़लक़ सूना नहीं होता
उसे गजब का शौंक है हरियाली का, रोज आकर जख्मों को हरा कर जाती है
जब लोगों के दिल भर जाते हैं..... तो दूर जाने के बहाने अपने आप मिल जाते हैं.....!
कुछ चुप रहती हूँ, कुछ बोलती हूँ, कुछ रिश्ते मेरे इसी से संभले हुए हैं ......
वो रो रो कर कहती रही, मुझे नफरत है तुमसे, मगर एक सवाल आज भी परेशान किये हुए है की अगर इतनी नफरत ही थी तो, वो रोई क्यों
पता नहीं क्यों मोहब्बत उस शख्स से हो जाती है जिसे हमारी बिलकुल क़दर नहीं होती न हमारी मोहब्बत की न हमारे एहसास की
चलते रहेंगे क़ाफ़िले मेरे बग़ैर भी यहाँ.एक तारा टूट जाने से, फ़लक़ सूना नहीं होता