आज आयी है मेरी याद उसे ज़रूर फिर किसी ने उसे ठुकराया होगा.
किताबों सी शख्सियत दे दे मालिक...सब कुछ बोल दूँ खामोश रहकर....
सब अपने से लगते है, लेकिन सिर्फ बातों से ..!
अपने रब के फैसले पर भला शक कैसे करुँ सजा दे रहा है अगर वो कुछ तो गुनाह रहा होगा..
कुछ चुप रहती हूँ, कुछ बोलती हूँ, कुछ रिश्ते मेरे इसी से संभले हुए हैं ......
जिस रात की कभी कोई सुबह नही होती हर रात उस रात का इंतेज़ार रहता है.......
आज आयी है मेरी याद उसे ज़रूर फिर किसी ने उसे ठुकराया होगा.
किताबों सी शख्सियत दे दे मालिक...सब कुछ बोल दूँ खामोश रहकर....
सब अपने से लगते है, लेकिन सिर्फ बातों से ..!
अपने रब के फैसले पर भला शक कैसे करुँ सजा दे रहा है अगर वो कुछ तो गुनाह रहा होगा..
कुछ चुप रहती हूँ, कुछ बोलती हूँ, कुछ रिश्ते मेरे इसी से संभले हुए हैं ......
जिस रात की कभी कोई सुबह नही होती हर रात उस रात का इंतेज़ार रहता है.......