कभी कभी हम किसी के लिए उतना जरूरी भी नहीं होते जितना हम सोच लेते है .
जब दर्द सहने की आदत हो जाती है ना, तोह असू आना खुद ही बंद हो जाते है |
टूट कर चाहना और टूट जाना बात छोटी है मगर जान निकल जाती है
सच को तमीज़ ही नहीं बात करने की, झूठ को देखो, कितना मीठा बोलता है....
मौत आये तो शायद दिन सवर जाए वरना ज़िंदगी ने तो मार ही डाला है
बहुत जल्दी भरोसा कर रहे हो, कभी पहले टूटा नहीं क्या?
कभी कभी हम किसी के लिए उतना जरूरी भी नहीं होते जितना हम सोच लेते है .
जब दर्द सहने की आदत हो जाती है ना, तोह असू आना खुद ही बंद हो जाते है |
टूट कर चाहना और टूट जाना बात छोटी है मगर जान निकल जाती है
सच को तमीज़ ही नहीं बात करने की, झूठ को देखो, कितना मीठा बोलता है....
मौत आये तो शायद दिन सवर जाए वरना ज़िंदगी ने तो मार ही डाला है
बहुत जल्दी भरोसा कर रहे हो, कभी पहले टूटा नहीं क्या?