जान तक देने की बात करते हैं यह लोग सच कहु तो दिल से दुआ भी नहीं करते

जान तक देने की बात करते हैं यह लोग सच कहु तो दिल से दुआ भी नहीं करते

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सोचते है, अब हम भी सीख ले यारों बेरुखी करना..सबको मोहब्बत देते-देते, हमने अपनी कदर खो दी है

कभी कभी हम किसी के लिए उतना जरूरी भी नहीं होते जितना हम सोच लेते है .

मुस्कुराना तो सीखना पड़ता हैं, रोना तो लोग सीखा देते हैं..

माफ़ी गलती की होती है, ज़िंदा लाश बनाने की नहीं

लिखूं तो कुछ ऐसा जिसे पढ़ वह रोए भी ना और रात भर सोए भी ना

जब दर्द सहने की आदत हो जाती है ना, तोह असू आना खुद ही बंद हो जाते है |

सोचते है, अब हम भी सीख ले यारों बेरुखी करना..सबको मोहब्बत देते-देते, हमने अपनी कदर खो दी है

कभी कभी हम किसी के लिए उतना जरूरी भी नहीं होते जितना हम सोच लेते है .

मुस्कुराना तो सीखना पड़ता हैं, रोना तो लोग सीखा देते हैं..

माफ़ी गलती की होती है, ज़िंदा लाश बनाने की नहीं

लिखूं तो कुछ ऐसा जिसे पढ़ वह रोए भी ना और रात भर सोए भी ना

जब दर्द सहने की आदत हो जाती है ना, तोह असू आना खुद ही बंद हो जाते है |