रिश्ते धीरे धीरे ही खत्म होते हैं बस पता अचानक सा चलता हैं .

रिश्ते धीरे धीरे ही खत्म होते हैं बस पता अचानक सा चलता हैं .

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माना मोहब्बत में होता नहीं जब्र, मगर बिन तेरे इस दिल को भी कहाँ है सब्र

सारी दुनिया के रुठ जाने से मुझे कोई दुख नहीं, बस एक तेरा खामोश रहना मुझे तकलीफ देता है.

मैंने दोस्ती माँगी थी वो इश्क़ देकर बर्बाद कर गया

वो दूर होकर भी पास हैं हमारी नहीं है फिर भी ख़ास है

सच को तमीज़ ही नहीं बात करने की, झूठ को देखो, कितना मीठा बोलता है....

बेहद हदे पार की थी हमने कभी किसी के लिए, आज उसी ने सिखा दिया हद में रहना...!!

माना मोहब्बत में होता नहीं जब्र, मगर बिन तेरे इस दिल को भी कहाँ है सब्र

सारी दुनिया के रुठ जाने से मुझे कोई दुख नहीं, बस एक तेरा खामोश रहना मुझे तकलीफ देता है.

मैंने दोस्ती माँगी थी वो इश्क़ देकर बर्बाद कर गया

वो दूर होकर भी पास हैं हमारी नहीं है फिर भी ख़ास है

सच को तमीज़ ही नहीं बात करने की, झूठ को देखो, कितना मीठा बोलता है....

बेहद हदे पार की थी हमने कभी किसी के लिए, आज उसी ने सिखा दिया हद में रहना...!!