रिश्ते धीरे धीरे ही खत्म होते हैं बस पता अचानक सा चलता हैं .

रिश्ते धीरे धीरे ही खत्म होते हैं बस पता अचानक सा चलता हैं .

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चेहरे अजनबी हो जाये तो कोई बात नही... लेकिन रवैये अजनबी हो जाये तो बडी तकलीफ देते हैं...

जब दर्द सहने की आदत हो जाती है ना, तोह असू आना खुद ही बंद हो जाते है |

कुछ चुप रहती हूँ, कुछ बोलती हूँ, कुछ रिश्ते मेरे इसी से संभले हुए हैं ......

कोई हमारा भी था, कल की ही बात है.

सुना है आज उस की आँखों मे आसु आ गये, वो बच्चो को सिखा रही थी की मोहब्बत ऐसे लिखते है

बात ये नहीं थी, कुछ कहना था तुम्हें.. तकलीफ़ ये है, कि तुम ख़ामोश क्यूँ रहे..

चेहरे अजनबी हो जाये तो कोई बात नही... लेकिन रवैये अजनबी हो जाये तो बडी तकलीफ देते हैं...

जब दर्द सहने की आदत हो जाती है ना, तोह असू आना खुद ही बंद हो जाते है |

कुछ चुप रहती हूँ, कुछ बोलती हूँ, कुछ रिश्ते मेरे इसी से संभले हुए हैं ......

कोई हमारा भी था, कल की ही बात है.

सुना है आज उस की आँखों मे आसु आ गये, वो बच्चो को सिखा रही थी की मोहब्बत ऐसे लिखते है

बात ये नहीं थी, कुछ कहना था तुम्हें.. तकलीफ़ ये है, कि तुम ख़ामोश क्यूँ रहे..