माना मौसम भी बदलते हैं मगर धीरे धीरे .. तेरे बदलने की रफ़्तार से तो हवाएं भी हैरान है .

माना मौसम भी बदलते हैं मगर धीरे धीरे .. तेरे बदलने की रफ़्तार से तो हवाएं भी हैरान है .

Share:

More Like This

वो रो रो कर कहती रही, मुझे नफरत है तुमसे, मगर एक सवाल आज भी परेशान किये हुए है की अगर इतनी नफरत ही थी तो, वो रोई क्यों

जिनको साथ नहीं देना होता वो अक्सर रूठ जाया करते हैं

हद से बढ़ जाये ताल्लुक तो ग़म मिलते हैं| हम इसी वास्ते हर सख्स से कम मिलते हैं|

एक खेल रत्न उसको भी दे दो, बड़ा अच्छा खेलती है वो दिल से

जरुरत से ज्यादा उम्मीद भी रिश्ते टुटने की वजह बन जाती है......

बदल जाते है वो लोग वक़्त की तरह जिन्हे हद सा ज्यादा वक़्त दिया जाता है....

वो रो रो कर कहती रही, मुझे नफरत है तुमसे, मगर एक सवाल आज भी परेशान किये हुए है की अगर इतनी नफरत ही थी तो, वो रोई क्यों

जिनको साथ नहीं देना होता वो अक्सर रूठ जाया करते हैं

हद से बढ़ जाये ताल्लुक तो ग़म मिलते हैं| हम इसी वास्ते हर सख्स से कम मिलते हैं|

एक खेल रत्न उसको भी दे दो, बड़ा अच्छा खेलती है वो दिल से

जरुरत से ज्यादा उम्मीद भी रिश्ते टुटने की वजह बन जाती है......

बदल जाते है वो लोग वक़्त की तरह जिन्हे हद सा ज्यादा वक़्त दिया जाता है....