समेट कर सारे जज़्बात रख दिये सिरहाने थोड़े सुकून के हक़दार हम भी हैं...
जितना तुझे किसी ने चाहा भी न होगा उतना तो मैंने सिर्फ तुझे याद किया है
शक तो था मोहब्बत में नुक़सान होगा, पर सारा हमारा ही होगा ये मालूम न था
झुठ बोलकर तो मैं भी दरिया पार कर जाता, मगर डूबो दिया मुझे सच बोलने की आदत ने
एक उम्र बीत जाती है किसी को अपना बनाने में और एक पल काफी होता है किसी अपने को गवाने में
बुरा वक़्त दर्द नहीं देता बुरे वक़्त में साथ छोड़ने वाले दर्द देते है
समेट कर सारे जज़्बात रख दिये सिरहाने थोड़े सुकून के हक़दार हम भी हैं...
जितना तुझे किसी ने चाहा भी न होगा उतना तो मैंने सिर्फ तुझे याद किया है
शक तो था मोहब्बत में नुक़सान होगा, पर सारा हमारा ही होगा ये मालूम न था
झुठ बोलकर तो मैं भी दरिया पार कर जाता, मगर डूबो दिया मुझे सच बोलने की आदत ने
एक उम्र बीत जाती है किसी को अपना बनाने में और एक पल काफी होता है किसी अपने को गवाने में
बुरा वक़्त दर्द नहीं देता बुरे वक़्त में साथ छोड़ने वाले दर्द देते है