खुदा जाने कोनसा गुनाह कर बैठे हैं हम कि तम्मनाओं वाली उम्र में तजुर्बे मिल रहे हैं

खुदा जाने कोनसा गुनाह कर बैठे हैं हम कि तम्मनाओं वाली उम्र में तजुर्बे मिल रहे हैं

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खुद पर भरोसा करना सिख़लो सहारा चाहे कितना ही सच्चा हो एक ना एक दिन साथ छोड़ ही देता हैं

ये दिल भी उसी पे मरता है जो हमारी कदर नहीं करता

रिश्ते वो होते हैं जिसमे शब्द कम और समझ ज्यादा हो......

सिलसिला आज भी वही जारी है, तेरी याद, मेरी नींदों पर भारी है

सब समेट कर बढ़ते रहना ..नदियों तुमसे सीख न पाया !

किसी से हद से ज़्यादा उम्मीद लगाओगे तो एक दिन उस उम्मीद के साथ खुद भी टूट जाओगे

खुद पर भरोसा करना सिख़लो सहारा चाहे कितना ही सच्चा हो एक ना एक दिन साथ छोड़ ही देता हैं

ये दिल भी उसी पे मरता है जो हमारी कदर नहीं करता

रिश्ते वो होते हैं जिसमे शब्द कम और समझ ज्यादा हो......

सिलसिला आज भी वही जारी है, तेरी याद, मेरी नींदों पर भारी है

सब समेट कर बढ़ते रहना ..नदियों तुमसे सीख न पाया !

किसी से हद से ज़्यादा उम्मीद लगाओगे तो एक दिन उस उम्मीद के साथ खुद भी टूट जाओगे