खुदा जाने कोनसा गुनाह कर बैठे हैं हम कि तम्मनाओं वाली उम्र में तजुर्बे मिल रहे हैं

खुदा जाने कोनसा गुनाह कर बैठे हैं हम कि तम्मनाओं वाली उम्र में तजुर्बे मिल रहे हैं

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उसे गजब का शौंक है हरियाली का, रोज आकर जख्मों को हरा कर जाती है

मेरे ग़म को कोई नहीं समझ सका क्यों के मुझे आदत थी मुस्कराने की

क्या फायदा अनलिमिटेड कॉलिंग और डाटा का जब कोई ढंग से बात करने वाला ही न हो

हमने भी एक ऐसे इंसान को चाहा, जिसे भूलना हमारे बस में नहीं और पाना किस्मत में नहीं.

मौत आये तो शायद दिन सवर जाए वरना ज़िंदगी ने तो मार ही डाला है

क़ोई ज़ुदा हो तो ऐसे ना हो, कि लौटने का भ्रम रह जाये

उसे गजब का शौंक है हरियाली का, रोज आकर जख्मों को हरा कर जाती है

मेरे ग़म को कोई नहीं समझ सका क्यों के मुझे आदत थी मुस्कराने की

क्या फायदा अनलिमिटेड कॉलिंग और डाटा का जब कोई ढंग से बात करने वाला ही न हो

हमने भी एक ऐसे इंसान को चाहा, जिसे भूलना हमारे बस में नहीं और पाना किस्मत में नहीं.

मौत आये तो शायद दिन सवर जाए वरना ज़िंदगी ने तो मार ही डाला है

क़ोई ज़ुदा हो तो ऐसे ना हो, कि लौटने का भ्रम रह जाये