प्यार बार बार नहीं होता, और हर यार वफ़ा दर नहीं होता
ये पतंग भी बिल्कुल तुम्हारी तरह निकली जरा सी हवा क्या लग गई हवा में उडने लगी
शब्द केवल चुभते है, खमोशियाँ मार देती हैं.
अजीब दस्तूर है, मोहब्बत का, रूठ कोई जाता है, टूट कोई जाता है
जरुरत से ज्यादा उम्मीद भी रिश्ते टुटने की वजह बन जाती है......
सब समेट कर बढ़ते रहना ..नदियों तुमसे सीख न पाया !
प्यार बार बार नहीं होता, और हर यार वफ़ा दर नहीं होता
ये पतंग भी बिल्कुल तुम्हारी तरह निकली जरा सी हवा क्या लग गई हवा में उडने लगी
शब्द केवल चुभते है, खमोशियाँ मार देती हैं.
अजीब दस्तूर है, मोहब्बत का, रूठ कोई जाता है, टूट कोई जाता है
जरुरत से ज्यादा उम्मीद भी रिश्ते टुटने की वजह बन जाती है......
सब समेट कर बढ़ते रहना ..नदियों तुमसे सीख न पाया !