बात वफाओं की होती तो कभी न हारते, बात नीसब की थी, कुछ ना कर सके |

बात वफाओं की होती तो कभी न हारते, बात नीसब की थी, कुछ ना कर सके |

Share:

More Like This

डूबे हुओं को हमने बिठाया था अपनी कश्ती में यारो..... और फिर कश्ती का बोझ कहकर, हमे ही उतारा गया

दिल को कागज समझ रखा है क्या.. आते हो, जलाते हो, चले जाते हो

उन्हें नफरत हुयी सारे जहाँ से, अब नयी दुनिया लाये कहाँ से

जरा देखो तो, ये दरवाजे पर दस्तक किसने दी है! 'इश्क' हो तो कहना, अब दिल यहाँ नहीं रहता…

जरुरत से ज्यादा उम्मीद भी रिश्ते टुटने की वजह बन जाती है......

ग़म इस बात का नहीं की आप मिल न सकेंगे, दर्द इस बात का है की हम आपको भुला न सकेंगे

डूबे हुओं को हमने बिठाया था अपनी कश्ती में यारो..... और फिर कश्ती का बोझ कहकर, हमे ही उतारा गया

दिल को कागज समझ रखा है क्या.. आते हो, जलाते हो, चले जाते हो

उन्हें नफरत हुयी सारे जहाँ से, अब नयी दुनिया लाये कहाँ से

जरा देखो तो, ये दरवाजे पर दस्तक किसने दी है! 'इश्क' हो तो कहना, अब दिल यहाँ नहीं रहता…

जरुरत से ज्यादा उम्मीद भी रिश्ते टुटने की वजह बन जाती है......

ग़म इस बात का नहीं की आप मिल न सकेंगे, दर्द इस बात का है की हम आपको भुला न सकेंगे