बहुत शोक था दुसरो को खुश रखने का होश तब आया जब खुद को अकेला पाया
बुरा लगता है हर बार किसी को अपनी याद दिलाना जिन में वफ़ा होती है खुद ही याद कर लेते हैं
मैं भी तलाश में हूँ, अब किसी अपने की..कोई आप सा तो हो, लेकिन किसी और का ना हो..
झुठ बोलकर तो मैं भी दरिया पार कर जाता, मगर डूबो दिया मुझे सच बोलने की आदत ने
बुरा हमें भी लगता है बस तुम्हे एहसास नहीं होने देते
कीमत दोनों की चुकनी पड़ती है, बोलने की भी और चुप रहने की भी ..!!
बहुत शोक था दुसरो को खुश रखने का होश तब आया जब खुद को अकेला पाया
बुरा लगता है हर बार किसी को अपनी याद दिलाना जिन में वफ़ा होती है खुद ही याद कर लेते हैं
मैं भी तलाश में हूँ, अब किसी अपने की..कोई आप सा तो हो, लेकिन किसी और का ना हो..
झुठ बोलकर तो मैं भी दरिया पार कर जाता, मगर डूबो दिया मुझे सच बोलने की आदत ने
बुरा हमें भी लगता है बस तुम्हे एहसास नहीं होने देते
कीमत दोनों की चुकनी पड़ती है, बोलने की भी और चुप रहने की भी ..!!