लिखूं तो कुछ ऐसा जिसे पढ़ वह रोए भी ना और रात भर सोए भी ना

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"मेरी आँखों की नमी ना जान पाया वो शख्स, एक अरसे तक जो इन आँखों में ही रहा था...!"

चलते रहेंगे क़ाफ़िले मेरे बग़ैर भी यहाँ.एक तारा टूट जाने से, फ़लक़ सूना नहीं होता

कौन करता है यहाँ प्यार निभाने के लिये, दिल तो बस एक खिलौना है जमाने के लिये

वहां तक तो साथ चलो जहाँ तक साथ मुमकिन है, जहाँ हालात बदलेंगे वहां तुम भी बदल जाना.

एक फ़क़ीर ने कहा था चिंता ना कर वो भी रोएगा जो आज तुझे रुला रहा है

शर्मिंदा करते हो रोज, हाल हमारा पूँछ कर, हाल हमारा वही है जो तुमने बना रखा है…

"मेरी आँखों की नमी ना जान पाया वो शख्स, एक अरसे तक जो इन आँखों में ही रहा था...!"

चलते रहेंगे क़ाफ़िले मेरे बग़ैर भी यहाँ.एक तारा टूट जाने से, फ़लक़ सूना नहीं होता

कौन करता है यहाँ प्यार निभाने के लिये, दिल तो बस एक खिलौना है जमाने के लिये

वहां तक तो साथ चलो जहाँ तक साथ मुमकिन है, जहाँ हालात बदलेंगे वहां तुम भी बदल जाना.

एक फ़क़ीर ने कहा था चिंता ना कर वो भी रोएगा जो आज तुझे रुला रहा है

शर्मिंदा करते हो रोज, हाल हमारा पूँछ कर, हाल हमारा वही है जो तुमने बना रखा है…