किसी को इतना IGNORE मत करो की वह तुम्हारे बिना जीना सिख जाए
एक थी समझने वाली मुझे ... अब वो भी समझदार हो गयी है
गुज़र गया आज का दिन भी पहले की तरह ना हमे फुरसत मिली ना उन्हे ख्याल आया .
एक उम्र बीत जाती है किसी को अपना बनाने में और एक पल काफी होता है किसी अपने को गवाने में
ज़िन्दगी ने तो एक बात सीखा दी की हम किसी के लिए हमेशा खास नहीं रह सकते
ज़रा सा खुश क्या होती हूँ किस्मत को बुरा लग जाता है
किसी को इतना IGNORE मत करो की वह तुम्हारे बिना जीना सिख जाए
एक थी समझने वाली मुझे ... अब वो भी समझदार हो गयी है
गुज़र गया आज का दिन भी पहले की तरह ना हमे फुरसत मिली ना उन्हे ख्याल आया .
एक उम्र बीत जाती है किसी को अपना बनाने में और एक पल काफी होता है किसी अपने को गवाने में
ज़िन्दगी ने तो एक बात सीखा दी की हम किसी के लिए हमेशा खास नहीं रह सकते
ज़रा सा खुश क्या होती हूँ किस्मत को बुरा लग जाता है