कीमत दोनों की चुकनी पड़ती है, बोलने की भी और चुप रहने की भी ..!!
इस दुनिया में अजनबी रहना ही ठीक है लोग बहुत तकलीफ देते है अक्सर अपना बना कर
जब से वो मशहूर हो गये हैं, हमसे कुछ दूर हो गये हैं…
अजीब दस्तूर है, मोहब्बत का, रूठ कोई जाता है, टूट कोई जाता है
मेरे ग़म को कोई नहीं समझ सका क्यों के मुझे आदत थी मुस्कराने की
वो लोग क्यों मिलते ही दिल में उतर जाते है, जिन लोगो से किस्मत के सितारे नहीं मिलते
कीमत दोनों की चुकनी पड़ती है, बोलने की भी और चुप रहने की भी ..!!
इस दुनिया में अजनबी रहना ही ठीक है लोग बहुत तकलीफ देते है अक्सर अपना बना कर
जब से वो मशहूर हो गये हैं, हमसे कुछ दूर हो गये हैं…
अजीब दस्तूर है, मोहब्बत का, रूठ कोई जाता है, टूट कोई जाता है
मेरे ग़म को कोई नहीं समझ सका क्यों के मुझे आदत थी मुस्कराने की
वो लोग क्यों मिलते ही दिल में उतर जाते है, जिन लोगो से किस्मत के सितारे नहीं मिलते