वक़्त हर ज़ख़्म का मरहम तो नहीं बन सकता, दर्द कुछ ऐसे होते हैं, ता-उम्र रुलाने वाले।
न हर्फ़-ए-शिकायत न इश्क़ रहा तुमसे जितना दिया था हँस कर बड़ी ख़ूबसूरती से मुस्कुराकर छीन लिया तुमने
मुझे नफरत है उस वक़्त से, जब "रोना" ही "बेहतर महसूस" करने का एकलौता तरीका बन जाता है।
अब तो ऐसा लगता है की, मैं ही वो अकेला इंसान हूं, जिसने मुझे निराश नहीं किया।
दर्द तो तब होता है, जब आपको पता चलता है.... कि आप उनके लिए अब उतने ज़रूरी नहीं रहे, जितना की आप कभी हुआ करते थे।
मेरी मुस्कुराहट के पीछे एक टूटा हुआ दिल है, मैं ठीक नहीं हूं, मैं बिल्कुल भी ठीक नही हूं।
वक़्त हर ज़ख़्म का मरहम तो नहीं बन सकता, दर्द कुछ ऐसे होते हैं, ता-उम्र रुलाने वाले।
न हर्फ़-ए-शिकायत न इश्क़ रहा तुमसे जितना दिया था हँस कर बड़ी ख़ूबसूरती से मुस्कुराकर छीन लिया तुमने
मुझे नफरत है उस वक़्त से, जब "रोना" ही "बेहतर महसूस" करने का एकलौता तरीका बन जाता है।
अब तो ऐसा लगता है की, मैं ही वो अकेला इंसान हूं, जिसने मुझे निराश नहीं किया।
दर्द तो तब होता है, जब आपको पता चलता है.... कि आप उनके लिए अब उतने ज़रूरी नहीं रहे, जितना की आप कभी हुआ करते थे।
मेरी मुस्कुराहट के पीछे एक टूटा हुआ दिल है, मैं ठीक नहीं हूं, मैं बिल्कुल भी ठीक नही हूं।