ऐसा लगता है, कि... मेरे शरीर का हर दूसरा हिस्सा भी अब टूट गया है।
ज़िन्दगी और तुमने मुझे इस हद तक दर्द दिया, की... अब मैं वो हँसता हुआ इंसान ना रहा जो मैं कभी हुआ करता था।
मेरी आँख ही नही मेरी आत्मा भी रोती है जब मेरी माँ घर के कोने में छुपकर रोती है आँसू पौंछती है अपने ही दामन के किनोर से चीख पड़ती हूँ मैं जब वो रोकर खामोश होती है.
जो तार से निकली है वो धुन सबने सुनी है, जो साज़ पर बीती है वो दर्द किस दिल को पता।
मुझे नफरत है उस वक़्त से, जब "रोना" ही "बेहतर महसूस" करने का एकलौता तरीका बन जाता है।
न हर्फ़-ए-शिकायत न इश्क़ रहा तुमसे जितना दिया था हँस कर बड़ी ख़ूबसूरती से मुस्कुराकर छीन लिया तुमने
ऐसा लगता है, कि... मेरे शरीर का हर दूसरा हिस्सा भी अब टूट गया है।
ज़िन्दगी और तुमने मुझे इस हद तक दर्द दिया, की... अब मैं वो हँसता हुआ इंसान ना रहा जो मैं कभी हुआ करता था।
मेरी आँख ही नही मेरी आत्मा भी रोती है जब मेरी माँ घर के कोने में छुपकर रोती है आँसू पौंछती है अपने ही दामन के किनोर से चीख पड़ती हूँ मैं जब वो रोकर खामोश होती है.
जो तार से निकली है वो धुन सबने सुनी है, जो साज़ पर बीती है वो दर्द किस दिल को पता।
मुझे नफरत है उस वक़्त से, जब "रोना" ही "बेहतर महसूस" करने का एकलौता तरीका बन जाता है।
न हर्फ़-ए-शिकायत न इश्क़ रहा तुमसे जितना दिया था हँस कर बड़ी ख़ूबसूरती से मुस्कुराकर छीन लिया तुमने