कष्ट/दुःख पाप का परिणाम है अथवा दुःख का जन्म पाप से होता है.

कष्ट/दुःख पाप का परिणाम है अथवा दुःख का जन्म पाप से होता है.

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मानसिक पीड़ा का एकमात्र मारक शारीरिक पीड़ा है . ||

सबसे ज़्यादा तकलीफ तो तब होती है, जब वो इंसान, जो कल आपको सबसे ज़्यादा खास महसूस करता था। आज वही आपको इतना अकेला और कमजोर महसूस कराता है।

मेरा दर्द किसी के लिए हंसने की वजह हो सकता है। पर मेरी हंसी कभी भी किसी के दर्द की वजह नहीं होनी चाहिए. ||

इस तरह मेरी तरफ मेरा मसीहा देखे, दर्द दिल में ही रहे और दवा हो जाए।

दर्द तो तब होता है, जब आपको पता चलता है.... कि आप उनके लिए अब उतने ज़रूरी नहीं रहे, जितना की आप कभी हुआ करते थे।

अब तो ऐसा लगता है की, मैं ही वो अकेला इंसान हूं, जिसने मुझे निराश नहीं किया।

मानसिक पीड़ा का एकमात्र मारक शारीरिक पीड़ा है . ||

सबसे ज़्यादा तकलीफ तो तब होती है, जब वो इंसान, जो कल आपको सबसे ज़्यादा खास महसूस करता था। आज वही आपको इतना अकेला और कमजोर महसूस कराता है।

मेरा दर्द किसी के लिए हंसने की वजह हो सकता है। पर मेरी हंसी कभी भी किसी के दर्द की वजह नहीं होनी चाहिए. ||

इस तरह मेरी तरफ मेरा मसीहा देखे, दर्द दिल में ही रहे और दवा हो जाए।

दर्द तो तब होता है, जब आपको पता चलता है.... कि आप उनके लिए अब उतने ज़रूरी नहीं रहे, जितना की आप कभी हुआ करते थे।

अब तो ऐसा लगता है की, मैं ही वो अकेला इंसान हूं, जिसने मुझे निराश नहीं किया।