इस तरह मेरी तरफ मेरा मसीहा देखे, दर्द दिल में ही रहे और दवा हो जाए।
सबसे ज़्यादा तकलीफ तो तब होती है, जब वो इंसान, जो कल आपको सबसे ज़्यादा खास महसूस करता था। आज वही आपको इतना अकेला और कमजोर महसूस कराता है।
किसी से ये उम्मीद रखना, के.... "वो पूरी ज़िन्दगी हमारे साथ चलेंगे...." बाद में हमे ही सबसे ज़्यादा दर्द देता है।
दुःख और सुख, अन्धकार एवं प्रकाश की भांति एक दूसरें के बाद आते रहते है, जो यह जानता है कि उसकी वापसी के प्रति अपने को अनुकूल किस प्रकार बनाया जाए तथा बुद्धिमानी के साथ दुखद पक्ष से अपने को बल पूर्वक छुड़ा सकता है, केवल वही जानता है कि जीवन किस प्रकार जिया जाता हैं.
तुम्हे याद करना, दर्दनाक नही है.... पर ये याद करना के तुम कभी मेरी थी, मुझे अंदर से तोड़ देता है।
मैं अब लोगों पर भरोसा नहीं करता हूं। क्योंकि मैं निराश होकर थक चुका हूं।
इस तरह मेरी तरफ मेरा मसीहा देखे, दर्द दिल में ही रहे और दवा हो जाए।
सबसे ज़्यादा तकलीफ तो तब होती है, जब वो इंसान, जो कल आपको सबसे ज़्यादा खास महसूस करता था। आज वही आपको इतना अकेला और कमजोर महसूस कराता है।
किसी से ये उम्मीद रखना, के.... "वो पूरी ज़िन्दगी हमारे साथ चलेंगे...." बाद में हमे ही सबसे ज़्यादा दर्द देता है।
दुःख और सुख, अन्धकार एवं प्रकाश की भांति एक दूसरें के बाद आते रहते है, जो यह जानता है कि उसकी वापसी के प्रति अपने को अनुकूल किस प्रकार बनाया जाए तथा बुद्धिमानी के साथ दुखद पक्ष से अपने को बल पूर्वक छुड़ा सकता है, केवल वही जानता है कि जीवन किस प्रकार जिया जाता हैं.
तुम्हे याद करना, दर्दनाक नही है.... पर ये याद करना के तुम कभी मेरी थी, मुझे अंदर से तोड़ देता है।
मैं अब लोगों पर भरोसा नहीं करता हूं। क्योंकि मैं निराश होकर थक चुका हूं।