तू इश्क की दूसरी निशानी दे दे मुझको, आँसू तो रोज गिर कर सूख जाते हैं।
वो निभा रही थी मोहब्बत अच्छे से.. कभी इधर... कभी उधर..
न जाने कौन सा आँसू मेरा राज़ खोल दे, हम इस ख़्याल से नज़रें झुकाए बैठे हैं।
बारिशें हो ही जाती हैं शहर में फ़राज़, कभी बादलों से तो कभी आँखों से।
दो चार आँसू ही आते हैं पलकों के किनारे पे, वर्ना आँखों का समंदर गहरा बहुत है।
यु ही हम दिल साफ़ रखते थे, पता नहीं था क कीमत चेहरे की थी
तू इश्क की दूसरी निशानी दे दे मुझको, आँसू तो रोज गिर कर सूख जाते हैं।
वो निभा रही थी मोहब्बत अच्छे से.. कभी इधर... कभी उधर..
न जाने कौन सा आँसू मेरा राज़ खोल दे, हम इस ख़्याल से नज़रें झुकाए बैठे हैं।
बारिशें हो ही जाती हैं शहर में फ़राज़, कभी बादलों से तो कभी आँखों से।
दो चार आँसू ही आते हैं पलकों के किनारे पे, वर्ना आँखों का समंदर गहरा बहुत है।
यु ही हम दिल साफ़ रखते थे, पता नहीं था क कीमत चेहरे की थी