इस दुनिया मेँ अजनबी रहना ही ठीक है, लोग बहुत तकलीफ देते है अक्सर अपना बना कर !
तुम्हे ना पाना शायद बेहतर है, पा के फिर से तुम्हे गवाने से.
हाथ की लकीरें भी कितनी अजीब हैं, हाथ के अन्दर हैं पर काबू से बाहर.
हिचकियो से इस बात का एहसास होता है शायद हमे भी कोई कहीं याद करता है बेशक मुलाक़ात नहीं होती मगर कुछ लम्हे हम पर बरबाद तो करता है
कोई नही आऐगा मेरी जिदंगी मे तुम्हारे सिवा, एक मौत ही है जिसका मैं वादा नही करता…
उसने कहा था आँख भरके देखा करो, अब आँख भर आती हैं पर वो नज़र नहीं आती!
इस दुनिया मेँ अजनबी रहना ही ठीक है, लोग बहुत तकलीफ देते है अक्सर अपना बना कर !
तुम्हे ना पाना शायद बेहतर है, पा के फिर से तुम्हे गवाने से.
हाथ की लकीरें भी कितनी अजीब हैं, हाथ के अन्दर हैं पर काबू से बाहर.
हिचकियो से इस बात का एहसास होता है शायद हमे भी कोई कहीं याद करता है बेशक मुलाक़ात नहीं होती मगर कुछ लम्हे हम पर बरबाद तो करता है
कोई नही आऐगा मेरी जिदंगी मे तुम्हारे सिवा, एक मौत ही है जिसका मैं वादा नही करता…
उसने कहा था आँख भरके देखा करो, अब आँख भर आती हैं पर वो नज़र नहीं आती!