एक हसरत थी की कभी वो भी हमे मनाये..पर ये कम्ब्खत Dil कभी उनसे रूठा ही नही.

एक हसरत थी की कभी वो भी हमे मनाये..पर ये कम्ब्खत Dil कभी उनसे रूठा ही नही.

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उसने महबूब ही तो बदला है ताज्जूब कैसा, दूआ कबूल ना हो तो लोग खूदा भी बदल लेते हैं !!

जी भर गया है तो बता दो हमें इनकार पसंद है इंतजार नहीं!

मैंने पूछा उनसे, भुला दिया मुझको कैसे, चुटकियाँ बजा के वो बोली ऐसे, ऐसे, ऐसे!!

कौन कहता है की सिर्फ ‪चोट‬ ही ‪दर्द‬ देता है असली दर्द मुझे तब होता है जब तू Online‬ आके भी Reply‬ नहीं देती…

कितने दर्दनाक थे वो मंजर जब हम बिछड़े थे उसने कहा था जीना भी नहीं और रोना भी नहीं.

ख़ामोशी बहुत कुछ कहती हे कान लगाकर नहीं, दिल लगाकर सुनो।

उसने महबूब ही तो बदला है ताज्जूब कैसा, दूआ कबूल ना हो तो लोग खूदा भी बदल लेते हैं !!

जी भर गया है तो बता दो हमें इनकार पसंद है इंतजार नहीं!

मैंने पूछा उनसे, भुला दिया मुझको कैसे, चुटकियाँ बजा के वो बोली ऐसे, ऐसे, ऐसे!!

कौन कहता है की सिर्फ ‪चोट‬ ही ‪दर्द‬ देता है असली दर्द मुझे तब होता है जब तू Online‬ आके भी Reply‬ नहीं देती…

कितने दर्दनाक थे वो मंजर जब हम बिछड़े थे उसने कहा था जीना भी नहीं और रोना भी नहीं.

ख़ामोशी बहुत कुछ कहती हे कान लगाकर नहीं, दिल लगाकर सुनो।