कोई भी क्रोधित हो सकता है- यह आसान है, लेकिन सही व्यक्ति से सही सीमा में सही समय पर और सही उद्देश्य के साथ सही तरीके से क्रोधित होना सभी के बस कि बात नहीं है और यह आसान नहीं है.
"क्रोध करने का मतलब है, दूसरों की गलतियों कि सजा स्वयं को देना; जब क्रोध आए तो उसके परिणाम पर विचार करो |"
इरादे सब मेरे साफ़ होते हैं, इसीलिए, लोग अक्सर मेरे ख़िलाफ़ होते हैँ…!!!
"क्रोध एक प्रकार का क्षणिक पागलपन है।"
क्रोध पर काबू पाने के लिए सदैव उसे फल के विषय में चिन्तन करना चाहिए…
"क्रोध से धनि व्यक्ति घृणा और निर्धन तिरस्कार का पात्र होता है |"
कोई भी क्रोधित हो सकता है- यह आसान है, लेकिन सही व्यक्ति से सही सीमा में सही समय पर और सही उद्देश्य के साथ सही तरीके से क्रोधित होना सभी के बस कि बात नहीं है और यह आसान नहीं है.
"क्रोध करने का मतलब है, दूसरों की गलतियों कि सजा स्वयं को देना; जब क्रोध आए तो उसके परिणाम पर विचार करो |"
इरादे सब मेरे साफ़ होते हैं, इसीलिए, लोग अक्सर मेरे ख़िलाफ़ होते हैँ…!!!
"क्रोध एक प्रकार का क्षणिक पागलपन है।"
क्रोध पर काबू पाने के लिए सदैव उसे फल के विषय में चिन्तन करना चाहिए…
"क्रोध से धनि व्यक्ति घृणा और निर्धन तिरस्कार का पात्र होता है |"