एक क्रोधित व्यक्ति अपना मुंह खोल लेता है और आँख बंद कर लेता है.
"क्रोध मस्तिष्क के दीपक को बुझा देता है | अतः हमें सदैव शांत व स्थिरचित्त रहना चाहिए |"
मत पूछना मेरी शख्सियत के बारे में हम जैसे दिखते है वैसे ही लिखते है …!
"मूर्ख मनुष्य क्रोध को जोर-शोर से प्रकट करता है, किंतु बुद्धिमान शांति से उसे वश में करता है |"
शहर भर मेँ एक ही पहचान है ‘हमारी’ सुर्ख आँखे, गुस्सैल चेहरा और नवाबी अदायेँ’!
"जो मनुष्य क्रोधी पर क्रोध नहीं करता और क्षमा करता है वह अपनी और क्रोध करनेवाले की महासंकट से रक्षा करता है।"
एक क्रोधित व्यक्ति अपना मुंह खोल लेता है और आँख बंद कर लेता है.
"क्रोध मस्तिष्क के दीपक को बुझा देता है | अतः हमें सदैव शांत व स्थिरचित्त रहना चाहिए |"
मत पूछना मेरी शख्सियत के बारे में हम जैसे दिखते है वैसे ही लिखते है …!
"मूर्ख मनुष्य क्रोध को जोर-शोर से प्रकट करता है, किंतु बुद्धिमान शांति से उसे वश में करता है |"
शहर भर मेँ एक ही पहचान है ‘हमारी’ सुर्ख आँखे, गुस्सैल चेहरा और नवाबी अदायेँ’!
"जो मनुष्य क्रोधी पर क्रोध नहीं करता और क्षमा करता है वह अपनी और क्रोध करनेवाले की महासंकट से रक्षा करता है।"