क्रोध वह हवा है जो बुद्धि के दीप को बुझा देती है।
"किसी विवाद में हम जैसे ही क्रोधित होते हैं हम सच का मार्ग छोड़ देते हैं, और अपने लिए प्रयास करने लगते हैं।"
क्रोध एक तरह का पागलपन है.
जो व्यक्ति बदले की भावना रखता है वो दरअसल अपने ही घावों को हरा रखता है.
जब सहनशीलता की सीमा पार करती है, तब प्रतिशोध की चिंगारी उठती है । यह चिंगारी क्रोध की ज्वाला बन जाती है, और फिर ज्वाला कहाँ देखती है कि, अपना घर जल रहा है, या दुश्मन का ।
"ईर्ष्या और क्रोध से जीवन क्षय होता है।"
क्रोध वह हवा है जो बुद्धि के दीप को बुझा देती है।
"किसी विवाद में हम जैसे ही क्रोधित होते हैं हम सच का मार्ग छोड़ देते हैं, और अपने लिए प्रयास करने लगते हैं।"
क्रोध एक तरह का पागलपन है.
जो व्यक्ति बदले की भावना रखता है वो दरअसल अपने ही घावों को हरा रखता है.
जब सहनशीलता की सीमा पार करती है, तब प्रतिशोध की चिंगारी उठती है । यह चिंगारी क्रोध की ज्वाला बन जाती है, और फिर ज्वाला कहाँ देखती है कि, अपना घर जल रहा है, या दुश्मन का ।
"ईर्ष्या और क्रोध से जीवन क्षय होता है।"