नेत्र केवल हमे दृष्टि प्रदान करते है परंतु हम कब.. किसमे क्या देखते है ये हमारी भावनाओ पर निर्भर करता है।
गलती कबूल करने और गुनाह छोड़ने में कभी देर ना करे क्योकिं सफर जितना लम्बा होगा वापसी उतनी मुश्किल हो जायेगी
आपकी नाजायज कमाई का लाभ कोई भी उठा सकता है पर आपके नाजायज कर्मो का फल आपको खुद ही भुगतना पड़ता है...
खुद को बदलने का सबसे तेज तरीका है, उन लोगों के साथ रहना जो पहले से ही उस रस्ते पर है जिस पर आप जाना चाहते हैं
जिदंगी मे अच्छे लोगो की तलाश मत करो खुद अच्छे बन जाओ आपसे मिलकर शायद किसी की तालाश पूरी हो
क्रोध में भी शब्दो का चुनाव ऐसा होना चाहिए कि कल जब गुस्सा उतरे तो खुद की नजरों में शर्मिंदा न होना पड़े
नेत्र केवल हमे दृष्टि प्रदान करते है परंतु हम कब.. किसमे क्या देखते है ये हमारी भावनाओ पर निर्भर करता है।
गलती कबूल करने और गुनाह छोड़ने में कभी देर ना करे क्योकिं सफर जितना लम्बा होगा वापसी उतनी मुश्किल हो जायेगी
आपकी नाजायज कमाई का लाभ कोई भी उठा सकता है पर आपके नाजायज कर्मो का फल आपको खुद ही भुगतना पड़ता है...
खुद को बदलने का सबसे तेज तरीका है, उन लोगों के साथ रहना जो पहले से ही उस रस्ते पर है जिस पर आप जाना चाहते हैं
जिदंगी मे अच्छे लोगो की तलाश मत करो खुद अच्छे बन जाओ आपसे मिलकर शायद किसी की तालाश पूरी हो
क्रोध में भी शब्दो का चुनाव ऐसा होना चाहिए कि कल जब गुस्सा उतरे तो खुद की नजरों में शर्मिंदा न होना पड़े