दास्तां सुनाऊं और मज़ाक़ बन जाऊँ बेहतर है मुस्कुराऊं और ख़ामोश रह जाऊँ

दास्तां सुनाऊं और मज़ाक़ बन जाऊँ बेहतर है मुस्कुराऊं और ख़ामोश रह जाऊँ

Share:

More Like This

हादसे कुछ दिल पे ऐसे हो गए, हम समुन्दर से भी गहरे हो गए

उनको लगी खरोंच का पता पुरे शहर को है, हमारे गहरे जख्म की कहीं चर्चा तक नहीं !!

एक घुटन सी होती है जीने में जब कोई दिल में तो रहता है पर साथ नहीं

जब दिल गैरो मैं लग जाए तब अपनों मैं खामिया नजर आने लगती है

मुझे किसी के बदल जाने का कोई गम नही बस कोई था जिससे ये उम्मीद नही थी

वो हाल भी ना पूछ सके...हमे..बे-हाल देख कर......हम हाल भी...ना बता सके... उसे खुश-हाल देख कर.......

हादसे कुछ दिल पे ऐसे हो गए, हम समुन्दर से भी गहरे हो गए

उनको लगी खरोंच का पता पुरे शहर को है, हमारे गहरे जख्म की कहीं चर्चा तक नहीं !!

एक घुटन सी होती है जीने में जब कोई दिल में तो रहता है पर साथ नहीं

जब दिल गैरो मैं लग जाए तब अपनों मैं खामिया नजर आने लगती है

मुझे किसी के बदल जाने का कोई गम नही बस कोई था जिससे ये उम्मीद नही थी

वो हाल भी ना पूछ सके...हमे..बे-हाल देख कर......हम हाल भी...ना बता सके... उसे खुश-हाल देख कर.......