सब ख़फ़ा है मेरे लहजे से...पर मेरे हाल से कोई रूबरू तक न हुआ.....
काम तो कुछ करती नहीं थक जाती हूँ बस तुम्हेे सोचते सोचते...।।
मुझ से पहले भी उसका कोई था मेरे बाद भी उसका कोई है
उदास छोड़ गया वो मुझको, खील उठता था मैं जिसके मुस्कुराने से ..!!
चलो बिखरने देते है जिंदगी को सँभालने की भी हद होती है
हम तो खुशियाँ उधार देने का कारोबार करते हैं साहब, कोई वक़्त पर लौटता नहीं हैं इसलिए घाटे मे है.
सब ख़फ़ा है मेरे लहजे से...पर मेरे हाल से कोई रूबरू तक न हुआ.....
काम तो कुछ करती नहीं थक जाती हूँ बस तुम्हेे सोचते सोचते...।।
मुझ से पहले भी उसका कोई था मेरे बाद भी उसका कोई है
उदास छोड़ गया वो मुझको, खील उठता था मैं जिसके मुस्कुराने से ..!!
चलो बिखरने देते है जिंदगी को सँभालने की भी हद होती है
हम तो खुशियाँ उधार देने का कारोबार करते हैं साहब, कोई वक़्त पर लौटता नहीं हैं इसलिए घाटे मे है.