गुणी व्यक्ति का आश्रय लेने से निर्गुणी भी गुणी हो जाता है।

गुणी व्यक्ति का आश्रय लेने से निर्गुणी भी गुणी हो जाता है।

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देश में "राजा" समाज में "गुरु" परिवार में "पिता" घर में "स्त्री" ये कभी "साधारण" नहीं होते क्योंकि ~ निर्माण और प्रलय ~ इन्हीं के "हाथ" में होता है

सफल जीवन के चार सुत्र मेहनत करे तो धन बने सब्र करे तो काम मीठा बोले तो पहचान बने और इज्जत करे तो नाम,

जीवन में कुछ भी स्थायी नहीं है इसलिए स्वयं को अधिक तनावग्रस्त न करें, क्योंकि परिस्थितियां चाहे कितनी भी खराब हों, बदलेंगी जरूर

वक्त, ख्वाहिशें और सपने हाथ में बंधी घड़ी की तरह होते हैं जिसे हम उतार कर रख भी दें तो भी चलती रहती है

आप चाहकर भी लोगो की अपने प्रति लोगो की धारणा नही बदल सकते इसलिए

हमेशा खुश रहा करो ये सोच कर की दुनिया मे हमशे भी ज्यादा परेशान ओर भी लोग है

देश में "राजा" समाज में "गुरु" परिवार में "पिता" घर में "स्त्री" ये कभी "साधारण" नहीं होते क्योंकि ~ निर्माण और प्रलय ~ इन्हीं के "हाथ" में होता है

सफल जीवन के चार सुत्र मेहनत करे तो धन बने सब्र करे तो काम मीठा बोले तो पहचान बने और इज्जत करे तो नाम,

जीवन में कुछ भी स्थायी नहीं है इसलिए स्वयं को अधिक तनावग्रस्त न करें, क्योंकि परिस्थितियां चाहे कितनी भी खराब हों, बदलेंगी जरूर

वक्त, ख्वाहिशें और सपने हाथ में बंधी घड़ी की तरह होते हैं जिसे हम उतार कर रख भी दें तो भी चलती रहती है

आप चाहकर भी लोगो की अपने प्रति लोगो की धारणा नही बदल सकते इसलिए

हमेशा खुश रहा करो ये सोच कर की दुनिया मे हमशे भी ज्यादा परेशान ओर भी लोग है