मृतिका पिंड (मिट्टी का ढेला) भी फूलों की सुगंध देता है। अर्थात सत्संग का प्रभाव मनुष्य पर अवशय पड़ता है जैसे जिस मिटटी में फूल खिलते है उस मिट्टी से भी फूलों की सुगंध आने लगती है।

मृतिका पिंड (मिट्टी का ढेला) भी फूलों की सुगंध देता है। अर्थात सत्संग का प्रभाव मनुष्य पर अवशय पड़ता है जैसे जिस मिटटी में फूल खिलते है उस मिट्टी से भी फूलों की सुगंध आने लगती है।

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सोने के साथ मिलकर चांदी भी सोने जैसी दिखाई पड़ती है अर्थात सत्संग का प्रभाव मनुष्य पर अवश्य पड़ता है।

इंसान को यूँ ही मतलबी नहीं कहा जाता, उसे अपने सुख से ज्यादा दुसरे के दुःख में मज़ा आता है

तुम व्यर्थ में ही अच्छे अवसरों को ढूंढने में लगे हो..तुम जिंदा हो क्या ये बड़ा अवसर नही हो

पहले निश्चय करिएँ, फिर कार्य आरम्भ करें।

अपनी आलोचना को धैर्य से सुनें यह हमारी ज़िन्दगी का मैल हटाने में साबुन का काम करती है !!

साधुजन के दर्शन से पुण्य प्राप्त होता है. साधु तीर्थों के समान होते हैं, तीर्थों का फल तो कुछ समय बाद मिलता है, किन्तु साधु समागम तुरंत फल देता है’

सोने के साथ मिलकर चांदी भी सोने जैसी दिखाई पड़ती है अर्थात सत्संग का प्रभाव मनुष्य पर अवश्य पड़ता है।

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तुम व्यर्थ में ही अच्छे अवसरों को ढूंढने में लगे हो..तुम जिंदा हो क्या ये बड़ा अवसर नही हो

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अपनी आलोचना को धैर्य से सुनें यह हमारी ज़िन्दगी का मैल हटाने में साबुन का काम करती है !!

साधुजन के दर्शन से पुण्य प्राप्त होता है. साधु तीर्थों के समान होते हैं, तीर्थों का फल तो कुछ समय बाद मिलता है, किन्तु साधु समागम तुरंत फल देता है’