मृतिका पिंड (मिट्टी का ढेला) भी फूलों की सुगंध देता है। अर्थात सत्संग का प्रभाव मनुष्य पर अवशय पड़ता है जैसे जिस मिटटी में फूल खिलते है उस मिट्टी से भी फूलों की सुगंध आने लगती है।

मृतिका पिंड (मिट्टी का ढेला) भी फूलों की सुगंध देता है। अर्थात सत्संग का प्रभाव मनुष्य पर अवशय पड़ता है जैसे जिस मिटटी में फूल खिलते है उस मिट्टी से भी फूलों की सुगंध आने लगती है।

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"व्यक्ति को मारा जा सकता है किन्तु विचारों को नहीं"

फिल्टर सिर्फ चित्र का होता है

ज़िंदगी को आसान नहीं बस खुद को मजबूत बनाना पड़ता है

जो आपके शब्दों का "मूल्य" नहीं समझता उसके सामने मौन रहना ही बेहतर है.

अपने हौंसले को यह मत बताओ कि तुम्हारी तकलीफ कितनी बड़ी है अपनी तकलीफ को यह बताओ कि तुम्हारा हौंसला कितना बड़ा है

"बहुत मुश्किल नहीं हैं, ज़िंदगी की सच्चाई समझना, "जिस तराज़ू ⚖पर दूसरों को तौलते हैं, उस पर कभी ख़ुद बैठ के देखिये।

"व्यक्ति को मारा जा सकता है किन्तु विचारों को नहीं"

फिल्टर सिर्फ चित्र का होता है

ज़िंदगी को आसान नहीं बस खुद को मजबूत बनाना पड़ता है

जो आपके शब्दों का "मूल्य" नहीं समझता उसके सामने मौन रहना ही बेहतर है.

अपने हौंसले को यह मत बताओ कि तुम्हारी तकलीफ कितनी बड़ी है अपनी तकलीफ को यह बताओ कि तुम्हारा हौंसला कितना बड़ा है

"बहुत मुश्किल नहीं हैं, ज़िंदगी की सच्चाई समझना, "जिस तराज़ू ⚖पर दूसरों को तौलते हैं, उस पर कभी ख़ुद बैठ के देखिये।