भर्री महफ़िल में दोस्ती का ज़िकर हुआ, हमने तो सिर्फ आपकी और देखा और लोग वाह वाह कहने लगे
तुम होते कौन हो मुझसे बिछड़ने वाले ?
सच्चे इश्क में अल्फाज़ से ज्यादा एहसास की एहमियत होती है
जब मेरे पास कोई नही था..तब मेरा साथ निभाने का शुक्रिया
उसके सिवा किसी और को चाहना मेरे बस में नहीं हे, ये दिल उसका हे , अपना होता तो बात और होती
मोहब्बत है मेरी इसीलिए दूर है मुझसे,अगर जिद होती तो शाम तक बाहों में होती
भर्री महफ़िल में दोस्ती का ज़िकर हुआ, हमने तो सिर्फ आपकी और देखा और लोग वाह वाह कहने लगे
तुम होते कौन हो मुझसे बिछड़ने वाले ?
सच्चे इश्क में अल्फाज़ से ज्यादा एहसास की एहमियत होती है
जब मेरे पास कोई नही था..तब मेरा साथ निभाने का शुक्रिया
उसके सिवा किसी और को चाहना मेरे बस में नहीं हे, ये दिल उसका हे , अपना होता तो बात और होती
मोहब्बत है मेरी इसीलिए दूर है मुझसे,अगर जिद होती तो शाम तक बाहों में होती