आप चाहे कितना भी भलाई का काम कर लो, मगर, उस भलाई की उम्र सिर्फ अगली गलती होने तक ही है
रिश्तो में झुकना कोई अजीब बात नही, सूरज भी तो ढल जाता है चाँद के लिए.
दान से ही हाथों कि सुन्दरता है न कि कंगन पहनने से. शरीर स्नान से शुद्ध होता है न कि चन्दन लगाने से. तृप्ति मान से होती है न कि भोजन से. मोक्ष ज्ञान से मिलता है न कि श्रृंगार से|
बक्श देता है खुदा उनको, जिनकी किस्मत खराब होती है…..वो हरगिज़ नहीं बक्शे जाएंगे जिनकी नियत खराब होती है |
गलत तरीके से पाई गई सफलता पर व्यक्ति घमंड कर सकता है, गर्व नही
किसी के दर्द की बैंडेज मत बनो क्योंकि जब घाव भर जाएगा तो तुम कूड़ेदान में फेंक दिए जाओग
आप चाहे कितना भी भलाई का काम कर लो, मगर, उस भलाई की उम्र सिर्फ अगली गलती होने तक ही है
रिश्तो में झुकना कोई अजीब बात नही, सूरज भी तो ढल जाता है चाँद के लिए.
दान से ही हाथों कि सुन्दरता है न कि कंगन पहनने से. शरीर स्नान से शुद्ध होता है न कि चन्दन लगाने से. तृप्ति मान से होती है न कि भोजन से. मोक्ष ज्ञान से मिलता है न कि श्रृंगार से|
बक्श देता है खुदा उनको, जिनकी किस्मत खराब होती है…..वो हरगिज़ नहीं बक्शे जाएंगे जिनकी नियत खराब होती है |
गलत तरीके से पाई गई सफलता पर व्यक्ति घमंड कर सकता है, गर्व नही
किसी के दर्द की बैंडेज मत बनो क्योंकि जब घाव भर जाएगा तो तुम कूड़ेदान में फेंक दिए जाओग