कभी कभी हम जीत कर वो नही सीखते, जो हार कर सीख जाते है|

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चीजें खुद नहीं होतीं, उन्हें करना पड़ता है

दुबारा गर्म की हुई चाय और समझौता किया हुआ रिश्ता दोनों में पहले जैसी मिठास कभी नही आती

खुशियाँ चाहे किसीके साथ भी बाँट लो, लेकिन गम भरोसेमंद के साथ ही बाँटना चाहिए

बुढ़ापे में आपको रोटी आपकी औलाद नहीं आपके दिए संस्कार खिलाएंगे

बदलाव के लिए समय का इंतज़ार मत करो... बदलाव समय के हाथ मे नही तुम्हारे हाथ मे है.

रिश्तो की सिलाई अगर भावनाओ से हुई है तो टूटना मुश्किल है और अगर स्वार्थ से हुई है, तो टिकना मुश्किल है.

चीजें खुद नहीं होतीं, उन्हें करना पड़ता है

दुबारा गर्म की हुई चाय और समझौता किया हुआ रिश्ता दोनों में पहले जैसी मिठास कभी नही आती

खुशियाँ चाहे किसीके साथ भी बाँट लो, लेकिन गम भरोसेमंद के साथ ही बाँटना चाहिए

बुढ़ापे में आपको रोटी आपकी औलाद नहीं आपके दिए संस्कार खिलाएंगे

बदलाव के लिए समय का इंतज़ार मत करो... बदलाव समय के हाथ मे नही तुम्हारे हाथ मे है.

रिश्तो की सिलाई अगर भावनाओ से हुई है तो टूटना मुश्किल है और अगर स्वार्थ से हुई है, तो टिकना मुश्किल है.