इज्जत किसी इंसान की नहीं होती हैं, ज़रूरत की होती हैं. ज़रूरत खत्म तो इज्जत खत्म
वैसे इंसान बनें जिस तरह के इंसान को आप पसंद करते हैं.
रिश्ते बरकरार रखने की सिर्फ एक ही शर्त है , भावना देखें , संभावना नहीं !!
एक बात कहूँ राज़ की कोई अगर तुम्हे सिर्फ ज़रुरत के वक़्त याद करता है तो समझ लेना की तुम उसके लिए ज़रूरी नहीं हो।
जो धोखा दे गया उसकी यादों में मरने से हज़ार गुना अच्छा है जो साथ है उसके साथ सुकून से जी लिया जाए!
आपके जीवन में बुराइयाँ आये, इस से पहले उन्हें मिट्टी में मिला दो… वरना वो तुम्हे मिट्टी में मिला देगी।
इज्जत किसी इंसान की नहीं होती हैं, ज़रूरत की होती हैं. ज़रूरत खत्म तो इज्जत खत्म
वैसे इंसान बनें जिस तरह के इंसान को आप पसंद करते हैं.
रिश्ते बरकरार रखने की सिर्फ एक ही शर्त है , भावना देखें , संभावना नहीं !!
एक बात कहूँ राज़ की कोई अगर तुम्हे सिर्फ ज़रुरत के वक़्त याद करता है तो समझ लेना की तुम उसके लिए ज़रूरी नहीं हो।
जो धोखा दे गया उसकी यादों में मरने से हज़ार गुना अच्छा है जो साथ है उसके साथ सुकून से जी लिया जाए!
आपके जीवन में बुराइयाँ आये, इस से पहले उन्हें मिट्टी में मिला दो… वरना वो तुम्हे मिट्टी में मिला देगी।