जब तक किसी व्यक्ति द्वारा अपनी संभावनाओं से अधिक कार्य नहीं किया जाता है, तब तक उस व्यक्ति द्वारा वह सब कुछ नहीं किया जा सकेगा जो वह कर सकता है
इंसान के अंदर ही समा जाए, वो स्वाभिमान होता है... और जो बाहर छलक जाए वो अभिमान होता है...
अपनी नाकामियों को स्वीकार करो, अपनी गलतियों को देखो और सुधार करो, जिन्दगी में कुछ किये बिना ही जय जय कार नहीं होती, और कोशिश करने वाले की कभी हार नहीं होती।
कोशिश हमेशा आखरी साँस तक करनी चाहिए या तो लक्ष्य हासिल होगा या अनुभव
ख़ुद की जिम्मेवारी और काम को सौंप बड़े गुमान से बैठा है, ख़ुदा ने जबसे माँ बनाई है खुद इत्मिनान से बैठा है।
किसी से अपना काम निकालना हो तो मधुर वचन बोलें. जिस प्रकार हिरण का शिकार करने के लिए शिकारी मधुर स्वर में गीत गाता है.
जब तक किसी व्यक्ति द्वारा अपनी संभावनाओं से अधिक कार्य नहीं किया जाता है, तब तक उस व्यक्ति द्वारा वह सब कुछ नहीं किया जा सकेगा जो वह कर सकता है
इंसान के अंदर ही समा जाए, वो स्वाभिमान होता है... और जो बाहर छलक जाए वो अभिमान होता है...
अपनी नाकामियों को स्वीकार करो, अपनी गलतियों को देखो और सुधार करो, जिन्दगी में कुछ किये बिना ही जय जय कार नहीं होती, और कोशिश करने वाले की कभी हार नहीं होती।
कोशिश हमेशा आखरी साँस तक करनी चाहिए या तो लक्ष्य हासिल होगा या अनुभव
ख़ुद की जिम्मेवारी और काम को सौंप बड़े गुमान से बैठा है, ख़ुदा ने जबसे माँ बनाई है खुद इत्मिनान से बैठा है।
किसी से अपना काम निकालना हो तो मधुर वचन बोलें. जिस प्रकार हिरण का शिकार करने के लिए शिकारी मधुर स्वर में गीत गाता है.