विकल्प मिलेंगे बहुत, मार्ग भटकने के लिए संकल्प एक ही काफी है मंज़िल तक जाने के लिए.

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अगर ईश्वर ने आपको नई शुरुआत करने का मौका दिया है, फिर पुरानी गलतियों को मत दोहराए

मुर्ख व्यक्ति उपकार करने वाले का भी अपकार करता है। इसके विपरीत जो इसके विरुद्ध आचरण करता है, वह विद्वान कहलाता है।

जिसके साथ बात करने से ही खुशी दोगुनी और दुख आधा रह जाये, वो ही अपना है.. बाकी तो बस दुनिया है..!!

यदि तुम्हारा पड़ोसी भूखा है तो मंदिर में प्रसाद चढ़ाना पाप है

उस मंजिल को पाने के लिए ध्यान केंद्रित करो जिसे आप पाना चाहते हो न कि वर्तमान स्थितियों पर जिसमें आप जी रहे हो।

खुद को कभी अकेला महसूस न करे क्योंकि

अगर ईश्वर ने आपको नई शुरुआत करने का मौका दिया है, फिर पुरानी गलतियों को मत दोहराए

मुर्ख व्यक्ति उपकार करने वाले का भी अपकार करता है। इसके विपरीत जो इसके विरुद्ध आचरण करता है, वह विद्वान कहलाता है।

जिसके साथ बात करने से ही खुशी दोगुनी और दुख आधा रह जाये, वो ही अपना है.. बाकी तो बस दुनिया है..!!

यदि तुम्हारा पड़ोसी भूखा है तो मंदिर में प्रसाद चढ़ाना पाप है

उस मंजिल को पाने के लिए ध्यान केंद्रित करो जिसे आप पाना चाहते हो न कि वर्तमान स्थितियों पर जिसमें आप जी रहे हो।

खुद को कभी अकेला महसूस न करे क्योंकि