विकल्प मिलेंगे बहुत, मार्ग भटकने के लिए संकल्प एक ही काफी है मंज़िल तक जाने के लिए.

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वक़्त बदलते देर नही लगती इसलिए कभी भी हद से ज्यादा फूलों मत और अपनों को कभी भूलो मत

जिसकी मति और गति सत्य कि हो उसका रथ आज भी श्री कृष्ण चलाते है

ख्वाहिश भले ही छोटी सी हो, लेकिन उसे पूरा करने की जिद होनी चाहिये

समझदार व्यक्ति अपनी समझदारी की वजह से चुप हो जाता है और मूर्ख को लगता है कि मेरे डर की वजह से चुप हो गया

इंसान का व्यक्तित्व तभी उभर के आता है जब वो अपनो से ठोकर खाता है...

भगवान से निराश कभी मत होना, संसार से आशा कभी मत करना

वक़्त बदलते देर नही लगती इसलिए कभी भी हद से ज्यादा फूलों मत और अपनों को कभी भूलो मत

जिसकी मति और गति सत्य कि हो उसका रथ आज भी श्री कृष्ण चलाते है

ख्वाहिश भले ही छोटी सी हो, लेकिन उसे पूरा करने की जिद होनी चाहिये

समझदार व्यक्ति अपनी समझदारी की वजह से चुप हो जाता है और मूर्ख को लगता है कि मेरे डर की वजह से चुप हो गया

इंसान का व्यक्तित्व तभी उभर के आता है जब वो अपनो से ठोकर खाता है...

भगवान से निराश कभी मत होना, संसार से आशा कभी मत करना