अगर सफल होना हैं तो गुस्सा, बेइज्जती, अपमान बहुत जरूरी हैं
देखा हुआ सपना,सपना ही रह जाता है जब तक उसे पूरा करने के लिए मेहनत ना कि जाये
जो खैरात में मिलती कामयाबी तो हर शख्स कामयाब होता, फिर कदर न होती किसी हुनर की और न ही कोई शख्स लाजवाब होता
आप सिर्फ इसलिए दुःखी हो क्योंकि आपने किसी झूठ को सच मान रखा है.
दोषहीन कार्यों का होना दुर्लभ होता है।
कर्म करो तो फल मिलता है, आज नहीं तो कल मिलता है जितना गहरा अधिक हो कुआँ, उतना मीठा जल मिलता है।
अगर सफल होना हैं तो गुस्सा, बेइज्जती, अपमान बहुत जरूरी हैं
देखा हुआ सपना,सपना ही रह जाता है जब तक उसे पूरा करने के लिए मेहनत ना कि जाये
जो खैरात में मिलती कामयाबी तो हर शख्स कामयाब होता, फिर कदर न होती किसी हुनर की और न ही कोई शख्स लाजवाब होता
आप सिर्फ इसलिए दुःखी हो क्योंकि आपने किसी झूठ को सच मान रखा है.
दोषहीन कार्यों का होना दुर्लभ होता है।
कर्म करो तो फल मिलता है, आज नहीं तो कल मिलता है जितना गहरा अधिक हो कुआँ, उतना मीठा जल मिलता है।